तुम्हारे नाम का सुमिरन

तुम्हारे नाम का सुमिरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी....

एकदंत हे करुणाकर तुम हो बुद्धि बल के स्वामी,
तीनों लोकों में है तुम्हारी सत्ता हो तुम अंतर्यामी,
तुम हो प्रथम पूजीय सब तुम्हारा ही गुण हैं गाते,
शीश झुका कर चरणों में मन वांछित फल हैं पाते,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी,
तुम्हारे नाम का सुमरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी.....

गज रूप तुम्हारा आनन है गजानन जग से न्यारा,
सबके मन को है भाता लम्बोदर सौम्य रूप तुम्हारा,
रिद्धि सिद्धि के भर्ता सुख कर्ता तुम हो जन नायक,
सब विधान है तुम्हारा हो तुम विधि के विधायक,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी,
तुम्हारे नाम का सुमरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी.....

है गले में तुम्हारे पुष्प माला धारो तुम माथे चंदन,
शीश मुकुट धरा तुम्हारे शीश झुका करते सब वंदन,
जन जन के हृदय में बसने वाले तुम सबका हित करते,
जो श्रद्धा भाव से तुमको ध्याते उनके कष्ट सब हरते,
जो करो दया तुम मुझ पर तुम्हारी कृपा होगी बड़ी,
तुम्हारे नाम का सुमरन करता रहूं मैं हर पल हर घड़ी.....
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