बैठे हो चुप क्यों साँवरे
( शबनम से, फूल, क्या खिले,
जब तक, बरसात, न हो ।
तेरी, तस्वीर से, दिल क्या भरे,
जब, तलक, बात न हो ॥)
बैठे हो, चुप क्यों, साँवरे,
बोलो, क्या बात है ॥
भक्तों, के संग, झूम लो ॥
कीर्तन, की रात है ।
बैठे हो, चुप क्यों, साँवरे...
दुल्हा, बनाया, है तुम्हें,
भक्तों, ने झूम के ।
ये, हो रहे, हैं बावरे,
कदमों, को चूम के ॥
भक्तों, की आई ॥।साँवरे
सज के, बारात है ।
भक्तों, के संग, झूम लो ॥
कीर्तन, की रात है ।
बैठे हो, चुप क्यों, साँवरे...
ऐसा, ग़ज़ब, समय प्रभु,
मस्ती, सी छा रही ।
मुस्कान, तेरी साँवरे,
क्या, ज़ुल्म ढाह रही ॥
सज, धज के बैठे ॥।साँवरे,
वाह वाह, क्या बात है ।
भक्तों, के संग, झूम लो ॥
कीर्तन, की रात है ।
बैठे हो, चुप क्यों, साँवरे...
ले के, बलैईयाँ, सांवरे,
तेरी, नज़रें उतार लूं ।
कहता, है रोमी, आज मैं,
जीवन, संवार लूं ॥
हमको, ये रात ॥।मिल गई,
क़िस्मत, की बात है ।
भक्तों, के संग, झूम लो ॥
कीर्तन, की रात है ।
बैठे हो, चुप क्यों, साँवरे...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल