जो बंध गया बाँके बिहारी से
तर्ज़- दिल लूटने वाले जादूगर
जो, बंध गया, बाँके, बिहारी से,
वो, छुट गया, दुनियाँ दारी से ।
जो, रंग गया, गोविंद, के रंग में,
वो, पहुंच गया, वृन्दावन में ।
ओ राधे राधे, राधे राधे,
राधे राधे, राधे राधे ॥
गोविन्द को, पाने, की चाहत,
तुझे, गोविंद से, मिलवाएगी ॥
ये प्रेम, मुहब्बत, ही इक दिन,
वृन्दा वन, खीँच ले जाएगी ॥
भगती, की लहरें, तन मन में,
तेरा, सोया, भाग्य जगाएगी ।
ओ राधे राधे, राधे राधे,
राधे राधे, राधे राधे ॥
जो, बंध गया, बाँके...
ब्रज, रज़ की, महिमा, कौन करे,
ब्रज रज़ तो, रस की, खान है ।
ब्रज, रज़ जब, माथे पे, लगती है,
ये सुख, स्वर्ग, समान है ॥
कण, कण में, माधव, बसे हुए,
मोहन की, लीला, धाम है ।
ओ राधे राधे, राधे राधे,
राधे राधे, राधे राधे ॥
जो, बंध गया, बाँके...
जो, पहूंच गया, वृन्दा वन में,
वो, प्रेम का, अलख़, जगाता है ।
जो, मिला है, बाँके, बिहारी से,
सारी, दुनियाँ में, गाता है ॥
वो वृन्दा, वन की, कुँजन में,
प्रेमी, प्रियत्तम, को पाता है ।
ओ राधे राधे, राधे राधे,
राधे राधे, राधे राधे ॥
जो, बंध गया, बाँके...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल