हराने की मुझको , कसम सब ने खाई ,
मगर मुझको कान्हा ने , जीत दिलाई ,
मेरे अपने सारे , सभी मुझसे रूठे ,
बस एक पल में ही , सारे रिश्ते वो टूटे ,
डूबने लगी जब , मेरे जीवन की नय्या ,
तब कान्हा ने नय्या , मेरी पार लगाई ,
हराने की मुझको , कसम सब ने खाई ,
मगर मुझको कान्हा ने , जीत दिलाई ,
जिसे अपना समझा , वो निकले पराए ,
दिल की ये बाते , अब किसको बताए ,
अंधेरे में डूबा , जब जीवन ये मेरा ,
तब कान्हा ने मुझको, नई रोशनी दिखाई ,
हराने की मुझको , कसम सब ने खाई ,
मगर मुझको कान्हा ने , जीत दिलाई ,
अब ना किसी पे , भरोसा करूंगा ,
जब तक जियूंगा , कान्हा की भक्ति करूंगा ,
अब राहे नई है , ये जीवन नया है ,
चलूंगा में उसी राह पर , जो कान्हा ने दिखाई ,
हराने की मुझको , कसम सब ने खाई ,
मगर मुझको कान्हा ने , जीत दिलाई ,
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore