साधो सो सतगुरु मोहिं भावै

साधो सो सतगुरु मोंहि भावै।

सत्त प्रेम का भर भर प्याला,आप
पिवै मोंहि प्यावै।
साधो सो सतगुरु मोहिं भावै...

परदा दूर करै आँखिन का,ब्रह्म
दरस दिखलावै।
जिस दरसन में सब लोक दरसै,
अनहद सबद सुनावै।
साधो सो सतगुरु मोहिं भावै...

एकहि सब सुख-दु:ख दिखलावै,
सबद में सुरत समावै।
कहैं कबीर ताको भय नाहीं,
निर्भय पद परसावै।
साधो सो सतगुरु मोहिं भावै...

बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000

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