सिया रघुवर जी के संग पडन लागे हरे हरे

सिया रघुवर जी के संग, पड़न लागे हरे-हरे
पड़न लागी भँवरिया॥
सिया रघुवर जी के संग...

पहली भाँवर पड़त ही, मंगल गावें नार
जनकपुरी में छाय गयो, खुशियन को त्योहार
सिया रघुवर जी के संग... ॥1॥

दूजी भाँवर पड़त ही, सखियन करें बधाय
सीता जी के संग में, राम लखन मुस्काय
सिया रघुवर जी के संग... ॥2॥

तीजी भाँवर पड़त ही, बाजे ढोल मृदंग
राम सिया की जोड़ी पै, बरसे फूल अनंग
सिया रघुवर जी के संग... ॥3॥

चौथी भाँवर पड़त ही, प्रेम बढ़्यो भरपूर।
सिया बनीं रघुवर की, राम सिया के नूर॥
सिया रघुवर जी के संग...॥4॥

पाँचवीं भाँवर पड़त ही, मंगल साज सजाय।
जनक नंदिनी सिया को, हर कोई शीश नवाय॥
सिया रघुवर जी के संग... ॥5॥

छठवीं भाँवर पड़त ही, गूँजे जय-जयकार।
सिया राम की जोड़ी पै, न्योछावर संसार॥
सिया रघुवर जी के... ॥6॥

सातवीं भाँवर पड़त ही, बँध गई प्रेम की डोर।
जनम-जनम तक साथ रहें, सिया राम चितचोर॥
सिया रघुवर जी के संग...॥7॥

भजन लेखक
विष्णु भैया जी श्याम सखा
संपर्क सूत्र:-7500580057

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