जिसका कैलाश में है डेरा
वो तो शिव शंभू है मेरा
जिसे मानती है दुनिया ये सारी
महादेव का पुजारी
मैं हूँ शंभू का पुजारी
महाकाल का पुजारी
मैं हूँ भोले का पुजारी
बहती जटाओं में है गंगा
माथे पे विराजे है जिसके गंगा
बजाते हैं डमरू से अद्भुत वो नाद
सोहे गले में है वासुकी नाग
वो तो कहलाए त्रिनेत्र धारी...
मेरे महाकाल तो है भस्म से नहाते बागंबर अपने वो तन पर सजाते
देवों के देव हैं वो मेरे महादेव
चरणों में बैठे जिसके ब्रह्मा विष्णु देव
हां वो नंदी जी की करते सवारी...
आदिकाल से है वो शिव महायोगी गौरे से बयां उसकी महिमा ना होगी
रहते सदा अपने भक्तों के साथ
बिन मांगे दे देते नाथों के नाथ
लीला अपरम्पार है तुम्हारी...