दोहा :
लाज दास की हाथ है, तेरे श्याम सरकार।
दीन बन्धु तारण तरण, दीनों के अधार ॥
तर्ज : फकीरी अलबेला रो खेल
श्याम मेरी लाज आपके हाथ,
दया करो प्रभु अपने दास पे, पूर्ण करो मम काज ॥टेर ॥
दीनदयाल विड़द संभारी, करूणा कर कहलाते- २
आप कृपा के सागर होके, क्यूं इतनी देर लगाते-२
करो कृतार्थ दया के सागर, दीनों के सरताज ॥श्याम ॥
तेरे भरोसे हे नटनागर, जीवन ये चलता है-२
घर परिवार दया तेरी से, बेसक प्रभु पलता है-२
सुबह शाम तेरे कीर्तन की, गूंजे मधुर आवाज ॥श्याम ॥
नाम आपका कभी ना भूलूं बस इतना वर दे दो- २
आप कभी ना भूलें हमको, इतना ही बस कहदो- २
दरश आपका मिलता रहे तो, बाजे अनहद साज ॥श्याम ॥
वरद हस्थ रखना मन मोहन, जैसे सदा रहा है-२
प्रेम भाव सबके हिरदय में, सदा बहे जो बहा है-२
सांवर दास सदा से तेरा, तूंहीं है इसका नाज॥श्याम ॥
लेखक -सांवरमल जी पारीक कोलकाता
सिंगर - नवरत्न पारीक 9887140192 ,9511528481