आओ श्याम के द्वार

आओ श्याम के द्वार, और दिल से करो पुकार,
है सच्चा ये दरबार
किसी को ना नहीं करता है।
ये सबकी झोली भरता है॥

श्री श्याम की जपले माला,
तेरा श्याम बने रखवाला।
रे मनवा क्यों घबराये,
तेरे साथ है खाटू वाला।
तू कहेगा, वो मिलेगा
तुझे जो भी है दरकार॥

जो हार के जग से आता
उसे चरणों से लिपटाता।
किसी दुखियारे के आँसू
मेरा श्याम देख नहीं पाता।
दुख सारे, प्रभु टारे
और खूब करे उसे प्यार॥

हैं ग्रह नक्षत्र भी सारे
इसके दरबार के चाकर।
ये शांत बैठ जाते हैं
श्री श्याम ईशारा पाकर।
लेखे-जोखे, श्याम देखे
मत इनका करो विचार॥

जो करता प्रेम है सच्चा
वो लगता श्याम को अच्छा।
उसे जी भर लाड़ लड़ाता
जैसे हो प्यारा बच्चा।
“बिनु” उसका, श्याम अपने
हाथों से करे सिंगार॥