राम नाम की नईया लेकर

राम नाम की नईया लेकर

राम नाम की, नईया लेकर, सतगुरु करे पुकार ॥
आजा, मेरी नईया में, ले चलूँ, भव से पार ॥

इस नईया में, जो कोई, चढ़ जायेगा ।
जनम जनम का, पाप सभी, धुल जायेगा ॥
कटे, चौरासी, के बंधन... ॥न पड़े, यम की मार,
आजा, मेरी नईया में, ले चलूँ, भव से पार ॥
राम, नाम की, नईया लेकर...

जीवन नईया, सौंप दे, मेरे हाथों में ।
स्वांस, स्वांस को, आने दो, मेरी यादों में ॥
पाप पुन्य का, बनकर आया... ॥मैं तेरा ठेकेदार,
आजा, मेरी नईया में, ले चलूँ, भव से पार ॥
राम, नाम की, नईया लेकर...

पाप गठरिया, शीश धरी, कैसे आऊँ ।
अपने ही, अवगुणों पे, मैं तो शरमाऊँ ॥।
नईया तेरी, साची भगवन... ॥मेरे पाप हज़ार,
आजा, मेरी नईया में, ले चलूँ, भव से पार ॥
राम, नाम की, नईया लेकर...

कर के दया, सतगुरु ने, चुनरिया रंग डाली ।
जनम, जनम की, मैली, चादर धो डाली ॥
दाग, पड़ी थी, मेरी चुनरिया... ॥हो गई लालम लाल,
आजा, मेरी नईया में, ले चलूँ, भव से पार ॥
राम, नाम की, नईया लेकर...

बड़े भाग्य से, सतगुरु, जी का प्यार मिला ।
हम भक्तों को, जीने, का अधिकार मिला ॥
लगे डूबने, बीच भंवर में... ॥आ गया खेवन हार,
आजा, मेरी नईया में, ले चलूँ, भव से पार ॥
राम, नाम की, नईया लेकर...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल