गाता रहूँ बस भजन तेरे नाम के

गाता रहूँ बस भजन तेरे नाम के
मुझको भी अपना लो बाबा आया तेरे धाम पे

वीरान लागे मोहे सारा जहाँ
तेरे सिवा मेरी मंजिल कहाँ
जीवन नैया पार लगा दो अपने हाथों थाम के हो ...

जिसने जो माँगा तूने सबको दिया
दुनिया की खातिर तूने जहर पिया
वानर भेष बनाया और सब काज संवारे राम के हो ...

तेरी कृपा से ही ये संसार है
जितना मिला है तेरा उपकार है
मानसभटके बीच भंवर में अब तो पार उतार दे हो ...

रचनाकार : मनीष मानस

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