गुफ़ा में है दरबार ओ शेराँ वाली माँ का
अब ना, छुपाऊँगी, सबको, बताऊँगी ।
तुझको, कसम से मईया, अपना, बनाऊँगी ॥
गुफ़ा में है, दरबार, ओ शेराँ, वाली माँ का ॥
पायल, मैं लाऊँगी, बिछुए भी लाऊँगी ।
तुमको, पहनाने मईया, मंदिर में आऊँगी ॥
करुँगी, सोल्हा श्रृंगार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
गुफ़ा में है, दरबार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
अब ना, छुपाऊँगी, सबको, बताऊँगी...
लँहगा, मैं लाऊँगी, चुनरी भी लाऊँगी ।
तुमको, पहनाने मईया, मंदिर में आऊँगी ॥
करुँगी, सोल्हा श्रृंगार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
गुफ़ा में है, दरबार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
अब ना, छुपाऊँगी, सबको, बताऊँगी...
कंगण, मैं लाऊँगी, चूड़ियाँ भी लाऊँगी ।
तुमको, पहनाने मईया, मंदिर में आऊँगी ॥
करुँगी, सोल्हा श्रृंगार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
गुफ़ा में है, दरबार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
अब ना, छुपाऊँगी, सबको, बताऊँगी...
टीका, मैं लाऊँगी, बिंदियाँ भी लाऊँगी ।
शीश पे, सजाने मईया, मंदिर में आऊँगी ॥
करुँगी, तुमको नमस्कार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
गुफ़ा में है, दरबार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
अब ना, छुपाऊँगी, सबको, बताऊँगी...
हलवा, मैं लाऊँगी, पूरी भी लाऊँगी ।
भोग, लगाने मईया, मंदिर में आऊँगी ॥
करुँगी, तेरी जय जयकार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
गुफ़ा में है, दरबार, ओ शेराँ, वाली माँ का ।
अब ना, छुपाऊँगी, सबको, बताऊँगी...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल