तर्ज साचो थारो दरबार
देखे कई दरबार पर खाटू जैसा प्यार
कहीं और ना मिला
वहाँ बैठे सरकार सुने सबकी पुकार
कहीं और ना मिला
लगती है अदालत और होती सुनवाई
तुम जाना जरूर
आते दुखियारे सुनाते अपने मन की
वो सुनते जरूर 2
करे दुख सब दूर
देखे कई दरबार पर खाटू जैसा प्यार
कहीं और ना मिला
छोड़े ये जमाना पर तू ना ठुकराना
ओ खाटूवाले श्याम
हाथ यूहीं रखना दया का मेरे सिर पे
मैं आता रहूँ धाम 2
बस गाऊँ श्याम श्याम
देखे कई दरबार पर खाटू जैसा प्यार
कहीं और ना मिला
थाम ली जो तुमने कलाई ये अनुज की
वो हारा नहीं श्याम
नाम से ही तेरे मिली है इस जग में
उसे तो पहचान 2
करे तेरा गुणगान
देखे कई दरबार पर खाटू जैसा प्यार
कहीं और ना मिला
लेखक: अनुज जैन