तेरे दरवाजे पर एक अर्जी छोड़ी है

दर्शन को तेरे आया, खुद को भुलाया,
पड़ा था जो मेरे मन में, कह भी ना पाया,
टूटी-फूटी वाणी लग सकती अधूरी है,
टूटी-फूटी वाणी लग सकती अधूरी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है,
तेरे दरवाजे पे एक अर्जी छोड़ी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है ॥

अर्जी की तेरे दर पे लंबी कतारें,
लाखों हैं जग में बाबा दुखिया-बेचारे,
उन सब अर्जियों में ही एक अर्जी मेरी है,
पढ़ लेना ओ बाबा ये बहुत जरूरी है,
तेरे दरवाजे पे एक अर्जी छोड़ी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है ॥

अकेले में पढ़ना बाबा जग ना हँसाना,
लाज प्रभु तुम मेरी हमेशा बचाना,
इस पंछी को तुमसे उम्मीदें पूरी हैं,
पढ़ लेना ओ बाबा ये बहुत जरूरी है,
तेरे दरवाजे पे एक अर्जी छोड़ी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है ॥

तुम तो वो बाबा बिन बोले सब सुन लेते हो,
बिना नब्स छुए हर रोग सही कर देते हो,
पतझड़ में हरियाली करते,
झोली सबकी खाली भरते,
लंगड़ों को चढ़ा दो पर्वत तुम,
अंधों को दिखा दो ये जगत तुम,
बांझन की गोद भर देते, मिट्टी सोना कर देते हो,
निर्बल को बल, निर्धन को धन
तुम बिन बोले दे देते हो,
अंतर्यामी हो श्याम तुम,
फिर भी तेरे दर पे कहने की इच्छा हो रही है…॥

तेरे दरवाजे पे एक अर्जी छोड़ी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है।
तेरे दरवाजे पे एक अर्जी छोड़ी है,
पढ़ लेना ओ बाबा, ये बहुत जरूरी है…
जय श्री श्याम!