भवानी गज़ब करे श्रृंगार
तर्ज़-कन्हईया ले चल परली पार
भवानी, ग़ज़ब, करे श्रृंगार ।
मईया मेरी, गज़ब, करे श्रृंगार ।
पहाड़ाँ वाली, गज़ब, करे श्रृंगार ।
नवरात्रों में, चली भवानी,
सब, भक्तों, के द्वार,
भवानी, गज़ब, करे श्रृंगार...
माथे, पे बिंदिया, होठों पे लाली ।
माला, पहनी, लड़ियों वाली ॥
पीला, शेर, सजे मईया का ॥
चलने, को तैयार,
भवानी, गज़ब, करे श्रृंगार...
हाथों, में चूड़ियाँ, पैरों में पायल ।
रूप, मईया का, कर दे घायल ॥
ऊपर से, ओढ़ी, लाल चूनरीया ॥
वो भी, गोटेदार,
भवानी, गज़ब, करे श्रृंगार...
सज, धज के जब, चले भवानी ।
महिमा, माँ की, ना जाए बखानी ॥
धरती, पर जब, उतरी मईया ॥
हो रही, जय जयकार,
भवानी, गज़ब, करे श्रृंगार...
दीन, दुखी को, चरण लगाए ।
खाली, झोलीयाँ, भर के जाए ॥
जो भी, माँ के, द्वारे आए ॥
कर, देती उद्धार,
भवानी, गज़ब, करे श्रृंगार...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल