ताल : भांगड़ा
हर कोई चाहे मैंयाजी से लेना,
पर.. देना है किसे, किसे न देना
ये मैंयाजी का शेर जांचता..
जब भरती है, भग्तों कि झोली,
खुशी से माँ का, शेर नाचता
मैंया का पीला, शेर नाचता..
शेरांवाली मैंया मेरी, बड़ी दिलदार है
बिगड़ी बनाने वाली, लखदातार है
तेरा ही भरोसा हमें, तेरा ही आधार है
हर कोई कहता तेरा, सांचा दरबार है
माताराणी बैठी, झोलियां भरण को,
पर.. अच्छे बुरे सबके करम को
ये मैंयाजी का शेर बांचता.. और जब भरती है
एक तरकीब कहूं, सुनो जरा गौर से
मैंयाजी के कीर्तन में, नचणा तू जोर से
मैंयाजी के भग्तों को, बुलाना चारों और से
गूंज उठे माँ का दर, जयकारों के शोर से
दिल खोल के जो, नाचै दरबार में,
और जो भी है दीवाना, माँ के प्यार में
ये शेर उनकी बात रखता.. और जब भरती है
हर जगह मैंयाजी को, शेर ही ले जाता है
भग्तों को मैंयाजी से, शेर ही मिलाता है
भग्तों की झोलियां ये, शेर भर-वाता है
अम्बरीष शेर को, शीश नवाता है
पुरा मौका है अभी भी, जरा सुनलो,
जो भी नाचते हैं, मस्ती में उनको
ये शेर दिल खोल बांटता.. और जब भरती है
Lyrics : Ambrish Kumar
9327754497 mumbai
https://youtu.be/kG5XiJ8umUw?si=omWaX_wUaShe।i4J