मेरे राघव के दरबार में

मेरे राघव के दरबार में

मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का खाता ॥
जिसने, जैसा, कर्म किया है, वैसा, ही फ़ल पाता...
मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का...

क्या, साधु क्या, संत गृहस्थी, क्या राजा क्या रानी ।
प्रभु, की बही में, लिखी हुई है, सबकी कर्म कहानी ॥
वही, सभी के, ज़मा खर्च का, सही, हिसाब लगाता...
मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का...

बड़े, बड़े, कानून प्रभु के, बड़ी बड़ी मर्यादा ।
किसी, को कोड़ी, कम नहीं देता, किसी को दमड़ी ज्यादा ॥
इसी, लिए तो, दुनियाँ में ये ॥जगत, सेठ कहलाता...
मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का...

नहीं, चले, उनके घर रिश्वत, नहीं चले चालाकी ।
उनके, अपने, लेन-देन की, रीत बड़ी है पाकी ॥
पुण्य, की नईया, पार लगाता ॥पाप की, नाव डुबाता...
मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का...

करता, वही, हिसाब सभी का, नित आसन पर डट के ।
उनका, फ़ैसला, कभी न बदले, लाख कोई सर पटके ॥
समझ, दार तो, चुप है रहता ॥मूर्ख, शोर मचाता...
मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का...

उज़ली, करनी, कर ले बंदे, कर्म ना करियो काला ।
लाख, आँख से, देख रहा है, तुझे देखने वाला ॥
उनकी, तेज़, नज़र से बंदे ॥कोई, नहीं बच पाता...
मेरे, राघव के, दरबार में, सब लोगों का...

अपलोडर- अनिलरामूर्तीभोपाल

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