नंदी ले चल काशी धाम
जहां बिराजे भोले बाबा
गोर जी के साथ
नदी ले चल काशी धाम
जटा में उनकी गंगा बिराजे
उनकी जटा में बहती रहती
गंगा की यह धार
नदी ले चल काशी धाम
गले में उनके सांपों की माला
उनके गले में लिपटा रहता
दिन भर काला नाग
ओ नंदी ले चल काशी धाम
हाथों में उनके डमरू बिराजे
उनके हाथों में बजता रहता डमरू
चारों धाम ओ नंदी ले चल काशी धाम