भजन : बोले राधे राधे मुरली मधुर धुन ।
बोले राधे राधे मुरली मधुर धुन,
नाचे अंग अंग मेरा सारा ।
गोपी रुक रुक देखें हरि को,
हँसता है जमुन किनारा ॥
वंशीवट की प्रिया छैया ।
देखो ठाढ़ो कुँवर कन्हैया ॥
देखो चम चम चमके रेती,
गोपी भूलि गयीं घर द्वारा ।बोले ...
मुरली हरि अधर पे शोभित ।
दर्शन हित सुर मुनि लोभित ॥
पीताम्बर उड़ता फर-फर,
मन्मथ मन लखि के हारा ।बोले...
नयनों की शोभा प्यारी ।
अरुणिम कपोल बनवारी ॥
देवादास चन्द्र द्युति निर्मल,
चहुँ दिशि फैला उजियारा ।बोले...
भजन रचना : प.पू.गुरुदेव श्री स्वामी देवादास जी महाराज ।
स्वर : प. पू. श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।