वाहरे मन मोहना, रिझाई डारे रे...
बंशी के धुन म राधा ल,नचाई डारे रे ॥
राधा हे दीवानी तोरे, मीरा हे दीवानी तोरे
महू ल दीवानी बनाये,
मुरली बजाके कान्हा,बंशी बजाके कान्हा
गोपी संग रास रचाये ,
चढ़ - वाहरे बेलबेल्हा, इतराई डारे रे
सावरे रंग म मोला, रंगाई डारे रे
वाह रे दिल जोगना, तरसाईं डारे
बंशी के धुन म राधा ल,नचाई डारे रे ॥
गईया ल चराये तैहा,माख्खन ल चोराये तैहा
गोपी मनला तै सताये,
छुम छूम भाग के,छम छम नाच के,
पाछू पाछू सबला भगाये,
चढ़ - वाहरे रंगरसिया,रासाई डारे रे
बंशी के धुन मा राधा ल नचाई डारे रे
वाहरे मन बसिया,मोहाई डारे रे
बंशी के धुन म राधा ल,नचाई डारे रे ॥
कान्हा ही है सीताराम,कान्हा ही है राधे श्याम,
मीरा के गुरधर गोपाला,
पार लागदे तू, बिगड़ी बनादे तू
नटखट यशोदा के लाला,
चढ़ शरधा के करभला,बंधाई डारे रे
वृन्दावन माटी म, सनाई डारे रे
बंशी के धुन म, राधा ला नचाई डारे रे ॥
( कृष्णा छत्तीसगढ़ि भजन )