कैंया रीझे श्याम रिझाने कोणी जाणु में
रिझाने कोणी जाणु में मनानो कोणी जाणु में
कैंया रीझे श्याम रिझाने .......
कोई तो पहनावे इन बागा चमकनिया
मोटा मोटा फुलड़ा का हर मेहकनिया
सोना सोना श्याम ने सजानो कोणी जाणु में
कैंया रीझे श्याम रिझाने .....
खीर चूरमे का भोग लगाउ,
छपन भोग सजाकर लाऊ
कर्मा को सो खीचड़ो,खुवानो कोणी जाणु में
कैंया रीझे श्याम रिझाने .....
नया नया नित की भजन सुनाऊ
ढोल मजीरा भी खूब बजाऊ
नरसी जैसो भाव जगानो कोणी जाणु में
कैंया रीझे श्याम रिझाने .....
साँची साँची प्रीत ही श्याम ने भावे
बिन्नू कैंया श्याम ने रिझावे
मीरा जैसी प्रीत लगानो कोणी जाणु में
कैंया रीझे श्याम रिझाने ....