आ भी जा

आ भी जा आ भी जा आ भी जा  
सुन ले वितनी अब तो कान्हा
तेरे दर्श को तरसे नैना
आके प्यास बुजा,आ भी जा आ भी जा

इज्जत का कोई मोल नही बस पैसे की सुन वाई है
जोगियों का वेश बना के सब ने लुट मचाई है
दुनिया तेरी दुनिया कान्हा पाप की  नैया खेती है
किसी को हस्ता देख न पाए खारे आंसू देती है
डगमग ढोले धर्म की नैया तेरे सिवा है कौन खिवैया आके पार लगा
आ भी जा आ भी जा ......

भूले भगती भूले शरदा मत्लब के सब करते कर्म
मतलब के है भाई चारे मतलब के सब दीन धर्म
झूठे रिश्ते झूठे नाते कान्हा बड़ा सताते है
सीने पे ये बार न करते पीठ पे छुरी चलाते है
हर तरफ है धोखा ही धोखा
दीप का अब न तोड़ भरोसा अपनी शरण लगा
आ भी जा आ भी जा आ भी जा

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