हरि काई लिखग थारा खाता म...

दोहा
बुरे करम कमाई के, साईं दोष न देय।
जैसी करनी अपनी,तैसा ही फल लेय॥

हरि काई लिखग थारा खाता म,हरि काई लिखग थारा खाता म।
तुनह जीवन बितई दियो बाता म, तुनह जीवन बितई दियो बाता म॥
हरि काई लिखग...

धन दौलत अरू महल अटारी।2
कईनी जाना को थारा साथा म।
तुनाह जीवन बितई दियों...

भाई बंधु न थारो कुटुम्ब कबीलों।2
सब खईची लेगा रे अपना हाथा म॥
तुनह जीवन बितई दियो...

यम का दूत तुखह पकड़ी लई जासे।2
फिरी डंडा मारग थारा माथा म ॥
तुनह जीवन बितई दियो...

कहत कबीरा सुनो रे भाई साधो।2
ध्यान लगाओ विधाता म।
तुनह जीवन बितई दियो बाता म।
हरि काई लिखग थारा खाता म॥

॥डॉ.सजन सोलंकी॥
9111337188

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