शिव शँकर चले कैलाश
शिव, शँकर, चले कैलाश,
नगाड़े, बजने लगे ॥
बजने, लगे हां, बजने लगे ॥
बजने लगे बजने लगे,
भक्तो, गूँज, रहा आकाश,
नगाड़े, बजने लगे...
शिव, शँकर, चले...
नंदी, बैल की, करके सवारी ।
देखो, चले, बाबा त्रिपुरारी ॥
संग, चली है, गौरा मात,
नगाड़े, बजने लगे...
शिव, शँकर, चले...
फ़ूल, बरसाए, देवता सारे ।
मुनि, जन सब, महाँ देव पुकारे ॥
उनकी, लीला का, हुआ प्रकाश,
नगाड़े, बजने लगे...
शिव, शँकर, चले...
डमरू, नाद और, शँख गूँजा रे ।
मृत्यु, लोक में, शम्भू पधारे ॥
सब, भक्त, लगाए आस,
नगाड़े, बजने लगे...
शिव, शँकर, चले...
कहे, “भगत” है शिव, अविनाशी ।
अँखियाँ, है दर्शन, की प्यासी ॥
मैं तो, तेरे चरण, का दास,
एक तुम, अपने लगे...
नगाड़े, बजने लगे...
शिव, शँकर, चले...
बरसाने वाली की जय
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल