कर ले निज़ काज़ जवानी में

कर ले निज़ काज़ जवानी में

कर ले, निज़ काज़, जवानी में,
इस, दो दिन की, जिन्दगानी मे ॥

मेहमान, जवानी, जाती है ।
फिर, लौट, कभी नहीं आती है ॥
हे मूढ़, इसे मत, खो देना,
तूँ किस्से, और कहानी में ।
कर ले, निज़ काज़...

सौभाग्य ये, नर तन, पाई है ।
बड़े, भाग्य जवानी, आई है ॥
भगवान, इसी में, मिलते हैं,
क्यों, ढूंढे पत्थर पानी में ।
कर ले, निज़ काज़...

तूँ इससे, खोज़, गुरु की कर ।
मिल, जाए तो न, किसी से डर ॥
गुरु, ही सब कुछ के, दाता हैं,
सुन, ले क्या, कहते बानी में ।
कर ले, निज़ काज़...

क्यों, इसको पाकर, भूल रहा ।
निज़, कर्तव्यों को, भूल रहा ॥
इन, भोगों से, मुख मोड़ के देख,
फिर, फर्क, मूर्ख क्या ज्ञानी में ।
कर ले, निज़ काज़...

ज्ञानी, ईश्वर का, प्यारा है ।
सेवक, गुरु भक्त, दुलारा है ॥
जो, गुरु कहते, तूँ मान उसे,
और, कर भक्ति, मर्दानी में ।
कर ले, निज़ काज़...
॥जय गुरुदेव ॥
अपलोडर- अनिलरामूर्तीभोपाल