मोहे नंदी बनइय्यो भोले

मोहे नंदी बनइय्यो भोले

शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, नंदी बनइय्यो भोले, अपने कैलाश को,
मैं नाच नाच, कूद कूद, तुमको रिझाऊँगो ।
मोहे, नाग बनईयो भोले, अपने गले को,
मैं शिव के, गले को, हार कहलाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, भिखारी बनईयो, तो बनईयो, काशी को,
मैं मांग मांग, टूक काशी, वासीयों से खाऊँगो ।
मोहे, गायक बनईयो, तो बनईयो, उज़्ज़ैन को,
मैं आठों याम, भोले भोले, भोले नाम गाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, त्रिपुण्ड बनईयो भोले, अपने मस्तक को,
मैं, तीनों लोकों के, सर को, ताज़ बन जाऊँगो ।
नील, कण्ठ बनईयो भोले, अपने गले को,
मैं, सारी दुनियाँ को, विष पी जाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, डमरू बनईयो भोले, अपने हाथन को,
मैं, दुनियाँ में, सुर संगीत सुनाऊँगो ।
मोहे, त्रिशूल बनईयो भोले, अपने हाथन को,
मैं असुर, जानो को, संहार कर पाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, पेड़ बनईयो, तो बनईयो, बेल पत्र को,
मैं भोले के, चरणों में, अर्पण हो पाऊँगो ।
मोहे, भस्म बनईयो, तो बनईयो, शमशान की,
मैं भस्म, आरती में, शामिल हो पाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, रुद्रक्ष बनईयो भोले, अपने बाग़ को,
मैं संत, जनों की, माला बन जाऊँगो ।
मोहे, फ़ूल बनईयो भोले, अपनी माला को,
मैं भोले भोले, बोल सारो, जग महकाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, पण्डित बनईयो भोले, प्रदीप मिश्रा सो,
मैं जग को, शिव महाँ, पुराण सुनाऊँगो ।
मोहे, दास बनईयो भोले, अपने चरण को,
मैं भोले, नाम के, भजन गाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥

मोहे, चन्दा बनईयो भोले, अपने मस्तक को,
मैं सारी, दुनियां को, रोशन कर पाऊँगो ।
मोहे, गँगा बनईयो भोले, अपनी जटा की,
मैं भारत, भूमि में, अमृत छलकाऊँगो ॥
शँकर... भोले... , शम्भु... भोले... ॥
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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