हमारे प्रेमानंद महाराज, हमे प्राणों से प्यारे हैं
लाडली लाल के प्यारे, श्रीहित हरिवंश दुलारे हैं
- आनंद कंद, प्रेम की मूरत
गोविंद शरण प्रेमानंद
सदा सखी भाव में रहते,
श्री राधा रस मतवारे है...
- हर उलझन को सुलझाते
वेद शास्त्र की नीति से
ज्ञान गुण सागर ब्रह्मज्ञानी,
संत संतों में न्यारे हैं...
- शारीरिक कष्ट हैं फिर भी
स्वस्थ और मस्त हैं मन से
नूर भक्ति का है मुख पर,
जीवत राधा नाम सहारे हैं...
- क्षेत्र सन्यास के कारण
वृन्दावन बाहर ना जाते हैं
यात्रा पांच कोसी की, प्रेम से करते सारे हैं...
- श्रीहित राधा केली कुंज में
हरि चर्चा सुनाते हैं
मधुपहरि भक्त हजारों ही,
करते नित दर्श दीदारे हैं...