हमारे प्रेमानंद महाराज हमे प्राणों से प्यारे हैं

हमारे प्रेमानंद महाराज, हमे प्राणों से प्यारे हैं
लाडली लाल के प्यारे, श्रीहित हरिवंश दुलारे हैं

  1. आनंद कंद, प्रेम की मूरत
    गोविंद शरण प्रेमानंद
    सदा सखी भाव में रहते,
    श्री राधा रस मतवारे है...

  2. हर उलझन को सुलझाते
    वेद शास्त्र की नीति से
    ज्ञान गुण सागर ब्रह्मज्ञानी,
    संत संतों में न्यारे हैं...

  3. शारीरिक कष्ट हैं फिर भी
    स्वस्थ और मस्त हैं मन से
    नूर भक्ति का है मुख पर,
    जीवत राधा नाम सहारे हैं...

  4. क्षेत्र सन्यास के कारण
    वृन्दावन बाहर ना जाते हैं
    यात्रा पांच कोसी की, प्रेम से करते सारे हैं...

  5. श्रीहित राधा केली कुंज में
    हरि चर्चा सुनाते हैं
    मधुपहरि भक्त हजारों ही,
    करते नित दर्श दीदारे हैं...

    Singer : Raghu Rasiya, Amritsar
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