तीन लोक के स्वामी है वो सर्व जगत आधार है
देवो में वो है देव बड़े वो सबके पालन हार है
अवंतिका नगरी जो बैठे करके भस्म श्रृंगार है…..
महाकाल सरकार है वो महाकाल सरकार है—
क्षिप्रा के तट बैठे वो देवो में देव निराले
काल कपाल भी काँपे ऐसे महाकाल मतवाले
जिनकी छाँया में पलता है ये सारा संसार है
महाकाल सरकार है वो महाकाल सरकार है
उज्जयिनी के राजा वो कण कण में उनका वास
भस्म रमाकर बैठे पूरी करते सबकी आस
चैन मिले बैचैन को ऐसा उनका दरबार है
महाकाल सरकार है वो महाकाल सरकार है।