पार्वती का शिव से नाता जैसे दीपक संग उजियारा

पार्वती का शिव से नाता,
जैसे दीपक संग उजियारा।
एक दूजे में ऐसे समाए,
जैसे नदिया में जल की धारा।
पार्वती का शिव से नाता॥

महलों की बेटी छोड़ के दुनिया,
वन में तप करने आई।
जिसके मन में शिव बसते थे,
उसको और ना कोई भाई।
धूप सही और वर्षा झेली,
मन से नाम पुकारा।
प्रेम अगर सच्चा हो दिल में,
मिलता है फिर प्यारा।
पार्वती का शिव से नाता,
जैसे दीपक संग उजियारा॥

शिव भोले थे ध्यान में बैठे,
गौरा प्रेम निभाती।
बिन बोले ही मन की बातें,
आंखों से कह जाती।
एक है शक्ति, एक है शंकर,
एक दूजे का सहारा।
शिव बिन शक्ति अधूरे जग में,
शक्ति बिन शिव बेचारा।
पार्वती का शिव से नाता,
जैसे दीपक संग उजियारा॥

ना सोने के महल की चाहत,
ना धन का कोई सपना।
गौरा ने बस शिव को मांगा,
शिव ने गौरा को अपना।
कैलाशों पर प्रेम ये गूंजे,
गूंजे जग ये सारा।
जिसने इनका नाम है पाया,
उसका बने सहारा।
पार्वती का शिव से नाता,
जैसे दीपक संग उजियारा।
एक दूजे में ऐसे समाए,
जैसे नदिया में जल की धारा।
पार्वती का शिव से नाता॥

।yrics and singer - Lad।a Mohit

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