शँकर जी कहें सुनो पार्वती
धुन-दिल लूटने वाले जादूगर
शँकर जी कहें, सुनो पार्वती,
दुनियाँ में, किसी का, कोई नहीं ॥
सब जीते जी के, नाते हैं,
और, अंत समय, पर कोई नहीं ।
शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...
थे, चार रतन, दशरथ जी के,
उनको, भी कैसा, भाग्य मिला ॥
जब, राम चले, वनवास उधर,
और, प्राण उड़े, तब कोई नहीं ।
शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...
वनवास, चली जब, सीता जी,
रघुवर, और लक्ष्मण, साथ गए ॥
पर, वक्त पड़ा, ऐसा भारी,
जब हरण हुआ, तब कोई नहीं ।
शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...
रावण, जैसा विद्वानी,
जिसे था, खुद पर, अभिमान बड़ा ॥
सोने, की लंका, राख हुई,
जब, मरण हुआ, तब कोई नहीं ।
शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...
सब, धर्म का डंका, पीट रहे,
पंडित मौला, ज्ञानी ध्यानी ॥
जब, मेरा जीवन, तरण हुआ,
ईश्वर के सिवा, और कोई नहीं ।
शँकर जी कहें, सुनो पार्वती...
अपलोडर-अनिलरामूर्तिभोपाल