रंगत बदल गई, मेरी किस्मत सँवर गई,
जब से श्याम तेरी नज़र मुझ पे पड़ गई।
सूनी थी जो जिंदगी, खुशियों से भर गई,
जब से श्याम तेरी नज़र मुझ पे पड़ गई।।
ठोकर पे ठोकर खाकर मैं हार चुका था,
दुनिया के मेले में खुद को मार चुका था,
तेरे दर की धूल मिली, बिगड़ी संवर गई,
जब से श्याम तेरी नज़र मुझ पे पड़ गई।।
आँसू थे आँखों में, होंठों पे फरियाद थी,
चारों तरफ अंधेरा, ना कोई उम्मीद थी,
मोरछड़ी क्या घूमी, तकदीर निखर गई,
जब से श्याम तेरी नज़र मुझ पे पड़ गई।।
जिसको भी जग ने ठुकराया, तूने अपनाया,
डूबती नैया को तूने ही पार लगाया,
'प्रमोद' की बंजर बगिया भी हरियाली बन गई,
जब से श्याम तेरी नज़र मुझ पे पड़ गई।।
लेखक
पं.प्रमोद शुक्ल
सोनल शुक्ला लखनऊ
9839603956