कुटिया निक्की जही मेरी

मैं किथे बैठावा राम कुटिया निक्की जही,
मेरी सुबह तो हो गयी शाम कुटिया निक्की जही,
जय श्री राम दो अक्षर दा प्यारा नाम,

जंगल जावा जल लैयावा,
अपने राम दे चरण धुलावा,
तुसी चरण धुलालो राम,
कुटिया निक्की जही........

जंगल जावा कुषा लैयावा,
अपने राम दा आसन लावा,
तुसी आसान ला लो राम,
कुटिया निक्की जही........

जंगल जावा फुल लैयावा,
अपने राम लाइ हार बनावा,
तुसी हार पवालो राम,
कुटिया निक्की जही.......

जंगल जावा लकड़ी लैयावा,
लकड़ी दिया खडावा बनावा
तुसी चरणी पालो राम,
कुटिया निक्की जही........

जंगल जावा बेर लैयावा,
अपने राम नु भोग लगावा,
तुसी भोग लगालो राम,
कुटिया निक्की जही.......

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