आनंद ही आनंद बरस रह्यो

आनंद ही आनंद बरस रहियो ,
बलिहारी ऐसे सद गुरु की मन कृष्ण प्रेम को तरस रहो,

धनभाग  हमारे गुरु ऐसे मिले,
दर्शन कर मन प्रेम खिले,
अप्राद अनर्थ सब दूर भागे ,
बलिहारी ऐसे सद गुरु ..........

क्या रूप अनोपम तुम पायो हो अखियो में सबकी छाए हो,
तारो के वीच चंदा दरस रहो
बलिहारी ऐसे सद गुरु ......

क्या प्रेम छठा क्या मधुर वाणी,
बरसात ऐसे जैसे निर्मल पानी,
मधुर मधुर शब्द मन बसियो,
बलिहारी ऐसे सद गुरु ........

download bhajan lyrics (1632 downloads)