प्रभु प्यार से जिसका सम्बन्ध हे

प्रभु प्यारे  से जिसका सम्बन्ध है
उसे हर दम आनंद ही आनंद है

झूठी ममता से कर दे किनारा
लेके सचे पिता का सहारा
जो उसकी रजा में रजा मंद है
उसे हर दम आनंद ही आनंद है

जिसकी गथनी में कोयल सी चेह्क है
और करनी में फूलो से मेहक है
प्रेम नगरी ही जिसकी सुगंद है
उसे हर दम आनंद ही आनंद है

निंदा चुगली न जिसको सुहावे
बुरी संगत की रगंत न आवे
सत्संग ही जिसको पसंद है
उसे हर दम आनंद ही आनंद है

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