श्याम की लाठी shyam ki laathi


सांवरिये की लाठी में आवाज़ कभी ना आएगी,
सब दरवाजे बंद मिलेंगे जिस दिन ये पड़ जाएंगी,
सांवरिये की लाठी में.....

तुझ से अच्छा कोई नहीं है दर पे दिखावा करता है,
धीरे धीरे घड़ा पाप का इस दुनिया में भरता हे,
जितनी भी तू अकडं दिखालें,
जितनी भी तू अकडं दिखालें धरी यही रह जाएगी,
सब दरवाजे बंद मिलेंगे जिस दिन ये पड़ जाएंगी,
सांवरिये की लाठी में.....

स्वार्थ में तू अंधा हो कर भूल गया रिश्ते नाते,
समझ में आती है बस तुझको अपने मतलब की बातें,
चाहे जितनी जोड़ ले दौलत,
चाहे जितनी जोड़ ले दौलत धरी यही रह जाएगी,
सब दरवाजे बंद मिलेंगे जिस दिन ये पड़ जाएंगी,
सांवरिये की लाठी में....

खाटू वाले के खातिर तो प्रेमी सभी बराबर है,
एक तराजू सबको तोलें नजर श्याम की सब पर हे,
जैसा भाव लाएं सांवरिया,
जैसा भाव सचिन लाए वैसी झोली भर जाएंगी,
सब दरवाजे बंद मिलेंगे जिस दिन ये पड़ जाएंगी,
सांवरिये की लाठी में,
बोलो श्याम बोलों श्याम श्याम श्याम श्याम.....

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