तुम दर पे आओ रे


झूमके गाओ रे  
जयकारे लगाओ रे
माँ का दरबार सजा है
तुम दर पे आओ रे
झूमके गाओ रे  
जयकारे लगाओ रे
दरबार है माँ का
रहमतों का खज़ाना
चले आओ दर पे
कुछ चाहो जो पाना
तुम भी चले आओ रे
माँ का दरबार सजा है
तुम दर पे आओ रे
झूमके गाओ रे  
जयकारे लगाओ रे
माँ के चरणों में
झुकता है संसार सारा
आता है पनाह में
पाने को सहारा
तुम भी चले आओ रे
माँ का दरबार सजा है
तुम दर पे आओ रे
झूमके गाओ रे  
जयकारे लगाओ रे
मन में भर श्रद्धा
माँ का जो ध्यान धरे
देवे सुख सारे
माई दुख दूर करे
राजीव तुम भी चले आओ रे
माँ का दरबार सजा है
तुम दर पे आओ रे
झूमके गाओ रे  
जयकारे लगाओ रे
©राजीव त्यागी
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  नजफगढ़ नई दिल्ली

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