सतगुरु सिंगा को सिंगाजी भजन

गढ़ पिपल्या को धाम बड़ो पावन
गुरु दरबार मख लग मनभावन
सिंगाजी जावां रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

सिंगा स्वामी की दुनिया दीवानी
अगल बगल माइ रेवा को पानी
दर्शन पावां रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

शरद पूनम को मेलों रे प्यारो
सिंगाजी जांव रे संसार सारों
झूला झूली आवा रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

भैया भी आव न, भाभी भी आव
संग म नाना लेखरू न ख लाव
आनंद मनावा रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे

पैदल आव कोई लाव रे गाड़ी
महाराज जितेंद्र लिख निमाड़ी
सिंगाजी गुण गावा रे, निशाण लइ न, सिंगाजी जावां रे



लेखक - जितेंद्र महाराज हरदा

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