तूने जो बजाई बंशी दौड के आ गई

तर्ज:- सारे रिश्ते नाते तोड के आ गई

तूने जो बजाई बंशी दौड के आ गई
सुन ले मेरे सांवरे सब छोड के आ गई

तू ही मेरी मंजिल तू ही ठिकाना
मैं जो शम्मा हूँ तो तू है परवाना
दुनिया से मन को मोड के आ गई

माता पिता और संग कि सहेली
कोई नही साथ मेरे बिल्कुल अकेली
सभी से मैं रिश्ते नाते तोड के आ गई

सुनते कन्हैया प्यार भरी मुरली
प्रेम का बादल आँखे मेरी भर ली
श्याम तेरी चुनरी मैं ओड के आ गई

कर दी है तेरे नाम ये जिन्दगानी
रूपगिरी फरमाए अपनी पुरानी
जीवन कि डोरी तुमसे जोड के आ गई

गायक एवं लेखक रूपगिरी वेदाचार्य जी

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