गोकुल में आए त्रिपुरारी
तर्ज़- ओ बरसने वाली ग़ुलाम तेरो बनवारी
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
सुँदर, नारी भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
हाथों, में मेंहदी, नयनों में कज़रा ।
बालों, में सुँदर, प्यारा सा गज़रा ॥
माथे पे, बिदियाँ प्यारी, बने है भोला, सुँदर नारी ।
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
हाथों, में कँगना, पैरों में पायल ।
देख के, सुर-मुनि, हुए हैं घायल ॥
सुँदर, नयन कटारी, बने है भोला, सुँदर नारी ।
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
रूप, देख, चंदा शरमाए ।
लहर, लहर, साड़ी लहराए ॥
चाल, चले है मतवाली, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
नाक में, नथ है, नथ में मोती ।
कानों में, कुंडल की, दिव्य ज्योति ॥
गालों पे, लट घुँघराली, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
जा, पहुंचे भोले, बृज मण्डल में ।
मुख की, शोभा, जैसी कमल के ॥
गले में हार, हज़ारी, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
भक्ति, में जाकर, मधुबन में देखा ।
राधा, संग में, मोहन को देखा ॥
रास, रचा बड़ा भारी, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
चुपके, से भोला, सखियों में मिल गए ।
पैरों, में घुँघरू, उनके मचल गए ॥
नाच रहे, भोला भंडारी, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
सब, सखियों ने, दर्शन पाया ।
मोहन ने, घूँघट जो उठाया ॥
मुस्काए, बनवारी, बने है भोला, सुँदर नारी ॥
गोकुल में, आए त्रिपुरारी, बने है भोला...
हर हर महाँदेव
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल