मोह माया म संगी

मोह माया म संगी, तैहा झन भुलाना
मतलब के रिस्ता नाता मतलब के जमाना
सुख म सब पास आहि, दुख म सब दूर हो जाहि
कलयुग के ये जमाना जी, सुन दीदी भैया वो [3]

विधि के लिखना ल कोनो नई टाल सके
प्रभु के महिमा ल कोनो नई जान सके
मनमा तै राम बसाले, आना मोर संग म गाले
सबर जाहि जिंगानी जी, सुन दीदी भैया वो [3]

सत संग के गंगा म नाहा लेते जी ॥
हा नहा लेते दीदी वो जिनगी ल सुघर बना लेते
हा नाहा लेते भैया वो जिनगी ल सुघर बना लेते
पाप के मन भरे तन म,धोवाजाहि संगी सबो तोर अंग ह
नइहे ठिकाना गा जतन कर ले
चारे दिन के जिनगी हे भजन कर ले
पाछू परही पछताना जी सुन दीदी भैया वो [3]

नई जावय संग तोर बंगला अउ गाडी
एके झन जाना पढ़ही सुनले संगवारी
छूट जाहि घर दुवारी,अउ संगी संगवारी ॥
चिता म लेके सुताही सुन दीदी भैया वो [2]
मरघाटिया म लेके सुताही वो सुन दीदी भैया [2]

गायक : विनय पटेल
श्री मंदाकनी मानस परिवार ग्राम नुनछापर
कवर्धा( छत्तीसगढ़ )

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