राधे कौन से पुण्य किए तुमने - स्वस्ती मेहुल

राधे कौन से पुण्य किए तुमने

राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने,
हरी रोज़, तेरे घर, आते हैं ॥
राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने,
प्रभु, बिन ही, बुलाए आते हैं ॥
राधे राधे, राधे राधे, राधे राधे, राधे राधे ॥

राधे जब, निधिवन में जाए ॥
हरि आकर, रास रचाते हैं ॥
महिमा इतनी, महांदेव स्वयं,
गोपेश्वर, बन के आते हैं ॥
राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने...

राधे जब, आकुल व्याकुल हो ॥
हरि बंसी सुना, सब हरते ने ॥
स्वस्ती बन जाए, वोह मधुर तान,
हरि, राधा को जो, सुनाते हैं ॥
राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने...

राधे जब हम, तेरा ध्यान धरें ॥
श्री कृष्ण स्वयं, दिख जाते हैं ॥
राधे कौन से, पुण्य किए तूने,
तेरे नाम से सब, सध जाते हैं ॥
राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने...

तुम मन में, कुछ भी, चाहो सखी ॥
आदेश समझ, हरि करते हैं ॥
राधे, पुण्य सुशोभित, हो तुम तो,
बिन ढूंढें, हरि मिल जाते हैं ॥
राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने...

राधे जब, सोलह श्रृंगार करे ॥
हरी दर्पण, रोज़ दिखाते हैं ॥
राधे कौन से, पुण्य किए तुमने,
हरी रोज़, तेरे घर आते हैं ॥
राधे, कौन से, पुण्य किए तुमने...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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