कन्हईया तेरी लीला अपरम्पार
धुन- कन्हईया ले चल परली पार
कन्हईया, तेरी लीला, अपरम्पार ।
साँवरिया, तेरी लीला, अपरम्पार ।
जनम, लिया, गोकुल में आए ॥
जग के, पालनहार,
कन्हईया, तेरी लीला...
कारा, गृह में, ताले लगे थे ।
मात, पिता, बंधन में बंधे थे ।
काली, घटा, छाई अम्बर में ।
बारिश, मूसला धार,
कन्हईया, तेरी लीला...
सारे, ताले, खोल दिए थे ।
बंधन, सारे, तोड़ दिए थे ।
सातों, द्वार, खोले, कान्हा ने ।
सो गए, पहरेदार,
कन्हईया, तेरी लीला...
वासु, देव, चले मथुरा से ।
बादल, गरज़, रहे अम्बर से ।
यमुना, नदी, चढ़ आई चरम पर ।
वासु, देव परेशान,
कन्हईया, तेरी लीला...
कान्हा, जी, मन में मुस्काए ।
यमुना, नदी में, पैर लगाए ।
पैर, लगाते, ही यमुना जी की ।
सूख, गई जल धार,
कन्हईया, तेरी लीला...
वासु, देव, गोकुल में आए ।
रातों, रात ही, वापस जाए ।
यशोद्धा, की, बेटी को लेकर ।
रख दिया, अपना लाल,
कन्हईया, तेरी लीला...
गोकुल, में, आई हैं खुशियां ।
नन्द के, घर में, जन्मे कन्हईया ।
ढोल, नगाड़े, बाज रहे हैं ।
चारों, ओर बहार,
कन्हईया, तेरी लीला...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल