जयकारे लगाने से माँ मान जाती है
जयकारे, लगाने से, माँ मान जाती है ॥
ओ सच्ची, ज्योत जगाने से, माँ मान जाती है...
जयकारे, लगाने से, माँ मान जाती है...
मन में, श्रद्धा रखकर जो भी, माँ की शरण में आ जाते ।
जय माता की, बोल के वो, दुखों से मुक्ति पा जाते ॥
चरणों में, फ़ूल चढ़ाने से, माँ मान जाती है...
जयकारे, लगाने से, माँ मान जाती है...
गुफ़ा में बैठी, सब को मुरादें, बांट रही दिन रात माँ ।
जो भी दिल से, बात सुनाता, सुनती है उसकी बात माँ ॥
दर पे, आने जाने से, माँ मान जाती है...
जयकारे, लगाने से, माँ मान जाती है...
ज्योतां वाली, माँ की ज्योति, जो भी घर में जगाते हैं ।
बिन मांगे ही, महाँरानी से, मन चाहा फ़ल पाते हैं ॥
ओ मन से, ध्यान लगाने से, माँ मान जाती है...
जयकारे, लगाने से, माँ मान जाती है...
जिन के मुख से, लग जाते हैं, मईया के जयकारे ।
उनके सोए, भाग्य जगाकर, करती वारे न्यारे ॥
ओ माँ की, भेटें गाने से, माँ मान जाती है...
जयकारे, लगाने से, माँ मान जाती है...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल