मंदिर ले निकले जब जोत

मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥
दरसन बर वो तरसे,नयना ले आशु बरसे,
निकले महामाई गंगा नहाये बर...

•देखत देखत मोर हिर्दय धक धकाये
•जोत जवारा मंदिर ले बहिराये
चमकत हे बाना भाला ।
मोंगारा के गुथे माला ।
दिखत हे बड़ निराला ।
जवारा आला आला ।
मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

•भोहे जवारा देवी पावे उसलाए,
•धीरे धीरे माई सब तोरे वो रेंगाए,
लागत हे जइसे मेला ।
भगत के जूरे रेला।।
छोड़े जावत हस अकेला ।
संग बाना बरन खेला ।
मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

•जावत हस दाई जाके गंगा म नहाबे,
•नव दिन के गौतम जल धारा म थिराबे,
कर डारे हव तमाशा ।
दुनिया भर तीन पचाशा ।
तब छोड़े नई हव आशा ।
हिर्दय म करबे बाशा ।
मंदिर ले निकले ज़ब जोत ॥2॥

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