मैं तो दंदरौआ में जाऊं, जाके अर्जी लगाऊं
और चोला चढ़ाऊँ चलके, लगाऊं पैदल परिक्रमा
मेरी विनती सुनेंगे, दंदरौआ वाले
मेरे कष्ट हरेगे, मेरे रखवाले
मेरी विनती सुनेगे ,मेरे कष्ट हरेगे, मेरे रोग कटेगें सारे
लगाऊं पैदल परिक्रमा़
मैं तो शीश झुकाऊं, हनुमत को मनाऊं
हनुमत को मनाऊं, उन्हें भोग लगाऊं
मैं तो शीश झुकाऊं, हनुमत को मनाऊं,
उन्हें भोग लगाऊं चलके, लगाऊं पैदल परिक्रमा़
अरे बूडो मंगल, दंदरौआ में मेला
और भक्त भी आवे, यहाँ भर भर के ठेला
सब अर्जी लगावे मिलके, लगाऊं पैदल परिक्रमा़