आरती गऊ माता की
ओम ! जय जय गोमाता, मैया जय जय गोमाता । पाप शाप दुःख हरणीं, सुखों की दाता ।।
क्षीरसिन्धु मंथन से, प्रगटी जो गैया ।। कामधेनूं वहीं नंदा, वही सुरभि मैया-जय०
रुद्रमात, वसुपुत्री, बहनां अदितिनंदनां ।। उसी गोवंश गोधन की, कर रहा जग वन्दना- जय०
अखिल विश्व की पालक, फल चारों दायिनी ।। आयु ओज बढ़ावे, रस अमृत खानी-जय०
सुर नर रिषि मुनि पूजित, गौ पूजित धाता ।। गोसेवा गोदर्श से, भव भय टर जाता जय०
धर्म कर्म की नैया, गौ अति हितकारी ।। गोबर दूध गोमूत्र, औषधि गुणकारी-जय०
जीवनधन गोमाता, गौ सम्मान करो ।। गो-गोविन्द गोपाला, का गुणगान करो-जय०
जहां गोवध गोहत्या, दुःख वहां वास करें ।। जहां गोसदन गोशाला, देव निवास करें - जय०
कर गोसेवा पूजा, आरती जो गावे ।। कहे 'मधुप' गो सहारे, भवजल तर जावे- जय०