दरबार बुला लो माँ एहसान तेरा होगा

दरबार बुला लो माँ एहसान तेरा होगा

धुन- होठों से छूह लो तुम
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा ।
मुझे,अपना, बना लो माँ, अहसान तेरा होगा।
एक, बार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा ।

मैं फ़ूल, कमल का हूँ, कीचड़ में खिलता हूँ ॥
चरणों से, लगा लो माँ, अहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

बागों, से फ़ूल चुने, मैंने हार बनाया है ॥
इसे, आप पहन लो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मैं, बेटी तेरी हूँ, तूँ माता मेरी है ॥
ये रिश्ता, निभा लो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मुझे, जग ने ठुकराया, माँ तुम ना ठुकराना ॥
आँचल में, छुपा लो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मेरे, मन के, मन्दिर में, तस्वीर तुम्हारी है ।
तेरे, इन हाथो में, तकदीर हमारी है ॥
तकदीर, बना दो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

तुम, देख रही हो माँ, मै देख नहीं सकता ।
माँ, बेटे का परदा, कभी हो ही नहीं सकता ॥
परदे, को हटा दो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

तुम, अष्ट भुजी हो माँ, तेरा रुप निराला है ।
तेरे, शीश मुकुट मईया, ग़ल मोतियन माला है ॥
अब, दर्श, दिखा दो माँ, अहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

मै धूल का, फूल हूँ माँ, दुनियाँ की ठुकराई ।
मै गिरती, सम्भलती माँ, दरबार तेरे आई ।
चरणों, से लगा लो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...

तूँ ही, है जग जननी, ओ शेरोँ वाली माँ ।
निर्बल, का सहारा हो, ओ शक्तिशाली माँ ।
दुष्टों, को संहारो माँ, एहसान तेरा होगा ।
दरबार, बुला लो माँ, एहसान तेरा होगा...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल

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