हरि हरि मेहंदी माँ

हरी हरी मेहंदी माँ मेया तेरे लाल ल्याया
राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

सोणा सोणा हाथों में झीणी झीणी राचणी
मेहंदी या मन भाई हिवड़े में बस ज्यासी
कारीगरी मांडन की देख मेया सीख आया
राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

देखरसी जो हाथों न करसी बड़ाई माँ
सांची कहूँ तुझसे ना होसी समाई माँ
थार लिये ही खातिर नमूनों कई चुन ल्याया
राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

एकर मंडाले माँ हरदम बुलावेली
मेहंदी जब “सुरभि” मांडसी याद म्हारी आवेली
पवन तेरे हरदम माँ मेहंदी मांडे मन च्याह
राचणी मेहंदी माँ टाबरिया घोल ल्याया

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