कि मोहन आप आ जाओ
कि मोहन, आ...प, आ जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ।
कन्हईया, आ...प, आ जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ॥
मेरा, मन याद, करता है,
नयन से, नीर, बहता है ॥
साँवरिया, आ...प, आ जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ।
कि मोहन, आ...प, आ जाओ...
मैं, अन्धी हूँ, मैं निर्बल हूँ ।
नहीं, कोई, सहारा है ॥
सहारा बन, के आ जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ॥
कि मोहन, आ...प, आ जाओ...
पड़ी, मंझधार, में नईया ।
इसे तुम, पार, लगा जाओ ॥
खिवईया बन, के आ जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ॥
कि मोहन, आ...प, आ जाओ...
ये यमुना जी, की लहरें हो ।
कदम्ब की, ठण्डी, छईया हो ॥
दर्श, इक्क बार, दे जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ॥
कि मोहन, आ...प, आ जाओ...
कभी मंदिर, में रहते हो ।
कभी, पर्दे, में रहते हो ॥
झलक, इक्क वर, दिखला जाओ,
मेरा मन, याद, करता है ॥
कि मोहन, आ...प, आ जाओ...
मेरा, मन चैन, छीना है ।
तेरी, मुरली, की तानों ने ॥
निधि, वन में, चले आओ,
मेरा मन, याद, करता है ॥
कि मोहन, आ...प, आ जाओ...
अपलोडर- अनिलरामूर्तिभोपाल