कान्हा...
तेरे बिना ये मन लागे ना...
आज दिल की बात कहे बिना चैन मिले ना...
बात दिल की कान्हा से छुपाना नहीं चाहिए,
अपने श्याम को कभी भुलाना नहीं चाहिए।
जो भी दर्द हो, जो भी अरमान हो,
दिल में रख के उसे दबाना नहीं चाहिए॥
बात दिल की कान्हा से छुपाना नहीं चाहिए...
जब भी नैया मझधार में डोले,
नाम तेरा सहारा बने।
सूनी राहों में तेरी बंसी,
जीने का इशारा बने॥
तू ही जाने मन की भाषा,
तुझसे क्या परदा करना।
अपने श्याम से अपनी बातें,
कभी ना छुपाकर रखना॥
बात दिल की कान्हा से छुपाना नहीं चाहिए,
अपने श्याम को कभी भुलाना नहीं चाहिए।
जो भी दर्द हो, जो भी अरमान हो,
दिल में रख के उसे दबाना नहीं चाहिए॥
आँखों में जब आँसू आएँ,
तेरा नाम पुकारूँ मैं।
सुख हो चाहे दुख की घड़ियाँ,
तेरे द्वारे आऊँ मैं॥
तू तो अंतर्यामी मोहन,
सब कुछ देखे जाने।
तेरे चरणों में जो झुके,
उसके बिगड़े काम बनाने॥
राधे राधे बोल सखी,
श्याम सुनेंगे पुकार।
दिल की हर इक धड़कन में,
बसते हैं गिरधार॥
दुनिया चाहे लाख सताए,
तू तो साथ निभाए।
तेरी कृपा की छाँव में मोहन,
हर दुख दूर हो जाए॥
तेरी प्रीत का दीप जलाकर,
जीवन सफल बनाऊँ।
दिल की सारी बातें कान्हा,
तेरे आगे गाऊँ॥
बात दिल की कान्हा से छुपाना नहीं चाहिए,
अपने श्याम को कभी भुलाना नहीं चाहिए।
जो भी दर्द हो, जो भी अरमान हो,
दिल में रख के उसे दबाना नहीं चाहिए॥
तेरे चरणों में कान्हा मेरे,
सारा जीवन बिताना चाहिए...॥